गतिविधिया

गोद भराई

गोद भराई को अंग्रेज़ी में ‘बेबी शॉवर (Baby Shower)’ कहा जाता है। गोद भराई का अर्थ है ‘गोद को प्रचुरता से भरना’। यह एक पारंपरिक रस्म है, जिसमें आने वाले बच्चे और गर्भवती को ढेरों आशीर्वाद दिए जाते हैं और दोनों के अच्छे स्वास्थ की कामना की जाती है। भारत के हर क्षेत्र में इस रस्म को अलग-अलग नाम दिए गए हैं। केरल में ‘सीमंथाम’, बंगाल में ‘शाद’, तो तमिलनाडु में इसे ‘वलकप्पू’ कहा जाता है। देश के हर क्षेत्र में गोद भराई करने का तरीका अलग-अलग हो सकता है, लेकिन उद्देश्य बच्चे और मां को आशीर्वाद देना होता है। इस दौरान गर्भवती को उपहार भी दिए जाते हैं। इस समारोह से पहले एक पूजा भी की जाती है। इस पूरे समारोह में केवल महिलाएं ही शामिल होती हैं। इस कार्यक्रम में गर्भवती को काफी अच्छे से तैयार किया जाता है।

नारी चौपाल

हमारे ग्रामीण परिवेश में महिलाएं गांव की चौपालों में नहीं जाती। इस प्रथा को तोड़ने के लिए तथा महिलाओं में आत्मसम्मान पैदा करने के लिए नारी चौपाल की व्यवस्था शुरू की गई है। महिलाएं चौपालों में जाकर अपने मन की बात कहें यहीं इन चौपालों के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। नारी चौपाल कार्यक्रम में महिलाओं को उनके स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जाता है। महिलाओं के क्या-क्या अधिकार है, अपने अधिकारों का संरक्षण कैसे करें आदि बातों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। महिलाएं चौपाल में आकर अपने मन की बात सबके सामने रखती है। महिलाओं को समाज में सम्मानजनक स्थान दिलवाने के लिए नारी चौपाल कार्यक्रम शुरू किया गया है।

रैली

रैली एक बड़ी जनसभा है जो किसी राजनीतिक दल जैसी किसी चीज़ के लिए समर्थन दिखाने के लिए आयोजित की जाती है। रैली का मुख्य कारण लोगों में जागरूकता फैलाना है।

हस्ताक्षर अभियान

लाखों हस्ताक्षर / संकेत (बहुमत में) एकत्र करके कानून या किसी भी सार्वजनिक मुद्दे के सुधार के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान कहा जाता है। यह प्रस्ताव / योजना पर अनुमोदन / असहमति का एक प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है। हालाँकि, ऐसे अभियानों की वैधता को पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया जा सकता है, ज्यादातर इसे समूह की राय के एक संकेतक के रूप में लिया जाता है।

बालिका जन्मोत्सव

जिले में बेटी बचाओ अभियान के अन्तर्गत जिले की समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों में अक्टूबर माह में जन्म लेने वाली बालिकाओं का जन्मोत्सव एवं उनके परिजनों का सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया जाता है ।
कार्यक्रम में अक्टूबर माह में जन्म लेने वाली बालिकाओं का केक काटकर जन्मोत्सव मनाया जाता है एवं उनके परिजनों का हल्दी, चंदन लगाकर स्वागत किया जाता है तथा बालिकाओं को उपहार दिया जाता है । कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं द्वारा मंगल एवं सोहर गीत गाकर उत्सव को रोचक बनाया जाता है । जिलेभर की समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों में उपस्थित महिलाओं को जीवन में स्त्री के महत्व को समझाते हुए बेटियों के देखभाल व उन्हें शिक्षित करने की दिशा में समझाइश दी जाती है । कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीण जनों एवं परिजनों को शासन द्वारा चलाई जा रही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना जैसी महत्वाकांक्षी योजना एवं कन्या भ्रूण हत्या आदि की जानकारी दी जाती है । समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संकल्प लिया जाता है । कुछ आंगनवाड़ी केन्द्रों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जागरूक किया जाता है ।

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस

अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है ताकि बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाई जा सके। अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 2012 से मनाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और उन्हें उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना, ताकि दुनिया भर में उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वे सामना कर सकें और अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें। साथ ही दुनिया भर में लड़कियों के प्रति होने वाली लैंगिक असामानताओं को खत्म करने के बारे में जागरूकता फैलाना भी है। भारत सरकार ने भी बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए काफी योजनाओं को लागू किया है जिसके तहत "बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओं" एक उल्लेखनीय योजना है। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार भी अन्य महत्वपूर्ण योजनायें शुरू कर रही है। भारत में भी 24 जनवरी को हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है।

राष्ट्रीय बालिका दिवस

भारत में हर साल 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2008 में इसकी शुरुआत की थी। इसके उद्देश्य की बात करें तो  यह लड़कियों को समान अधिकार देने से संबंधित है। लड़कियों को जिन असमानता का सामना करना पड़ता है, उनको दुनिया के सामने लाना और लोगों के बीच बराबरी का अहसास पैदा करना, लड़कियों के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण समेत कई अहम विषयों पर जागरूकता पैदा करना है। लैंगिक भेदभव बहुत बड़ी समस्या है। लड़कियों को शिक्षा, कानूनी अधिकार और सम्मान जैसे मामले में असमानता का शिकार होना पड़ता है। देश भर में इस मौके पर तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इसका उद्देश्य  लोगों के बीच लड़कियों के अधिकार को लेकर जागरूकता पैदा करना और लड़कियों को नया अवसर मुहैया कराना है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

यह दिन महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा, प्यार प्रकट करते हुए शैक्षणिक, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। पूरी दुनिया में महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जाती है, समाधान खोजे जाते हैं और संकल्प लिए जाते हैं। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिला जागरूकता और सशक्तिकरण का आयोजन है। जानकारी और जागरूकता महिलाओं और पुरुषों में भेदभाव मिटाने के सबसे बड़े हथियार हैं। सन् 1910 में महिलाओं की समस्याओं के समाधान हेतु बीजिंग में एक विश्व सभा बुलाई गई थी। उसी दिन की स्मृति में प्रतिवर्ष 8 मार्च को महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। शिक्षा पाकर लड़कियां आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी तो आर्थिक आजादी के साथ ही समानता की भावना भी पनपेगी। महिलाओं में अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी है। तभी वे अपनी सुरक्षा खुद कर पाएंगी, तब समाज, पुलिस और कानून भी उनकी मदद करेगा।